Categories: Plant Growth Regulator
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अतुल्य जिंक एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सूक्ष्म तत्त्प है जो एन्जाईमों के लिए प्रेरक का काम करता है। खेत में जिंक का अभाव होने पर फसल उत्पादन में भारी कमी तथा पौधे रोगग्रस्त हो जाते हैं। जिंक की कमी के लक्षण अधिकतर नए पत्तों पर दिखते हैं, जिससे पत्ते धब्बेदार हो जाते हैं, तथा पौधों की वृद्धि रूक जाती है। बड़े पेड़ों के पत्तों का चितकबरा (रंग बिरंगा) तथा छोटा हो जाना, जिंक की कमी के लक्षण है। कॅल्शियम युक्त एंव क्षारीय मिट्टी में यह एक सामान्य समस्या है। मिट्टी का pH-7 से अधिक होने पर जिंक की उपलब्धता कम हो जाती है। जिप्सम का प्रयोग करने पर भी मिट्टी में पर्याप्त जिंक एक जटिल संरचना (ज़िंकेट) में बदल जाता है और पौधों को प्राप्त नहीं होता। अतुल्य जिंक की विशेषताएँ: अतुल्य जिंक के उपयोग से अम्ल बनता है जो मिट्टी के pH को कम करता है जिससे अघुलनशील जिंक सल्फाईड, जिंक ऑक्साइड तथा जिंक कार्बोनेट एंव अन्य जटिल संरचनाएँ टूटती हैं और घुलनशील जिंक पौधों। को उपलब्ध हो जाता है। इसके उपयोग से पोषक तत्त्वों की उपलब्धता बढ़ती है जिससे मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार तथा उपज में वृद्धि होती है। यह सभी फसलों जैसे - अनाज (गेहूँ, धान, मक्का ), दलहन, तिलहन, फल (अंगूर, सन्तरा, अनार), सब्जी, मसाला, फूल, कपास, गन्ना आदि फसलों के लिए अत्यन्त उपयोगी है। उपयोग: मात्रा : २ किलो ग्राम प्रति एकड़। विधि : ९० किलो प्रति एकड़ के हिसाब से सड़ी हुई गोबर की खाद या खेत की मिट्टी में अतुल्य जिंक को अन्य जीवाणु उत्पादों (जिन्हें मिट्टी में डालना है) के साथ खूब अच्छी तरह से मिला लें। फिर अन्तिम जुताई या बुआई से ठीक पहले खेत में अच्छी तरह बुरक दें। इसका उपयोग फसल की बोआई / रोपाई के बाद या ४५ दिनों तक किया जा सकता है। उपयोग के बाद हल्की सिंचाई करें। फलों के बागों में प्रति पेड़ ५०-९०० ग्राम की दर से साल में दो बार उपयोग करें। सावधानियाँ: (९) उपयोग के दौरान खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। (२) पैकेट की पूरी मात्रा एक बार में उपयोग करें। (३) गोबर की खाद पूरी तरह से सड़ी हुई होनी चाहिए। (४) इसका संग्रह ठण्डा व शुष्क स्थान पर सीधी धूप एव गर्मी से बचाकर करें।